*’संपादकीय’*
*’बड़सर को सुक्खू की सौगात: 15 साल का इंतजार खत्म, भाजपा को सियासी सबक’*
*’मिनी सचिवालय + बस अड्डा + राज्यस्तरीय 15 अगस्त = विकास की तिहरी मार’*
राजनीति में कहा जाता है – “काम बोलता है”। और *’मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू’* ने बड़सर आकर यही करके दिखाया।
15 साल से फाइलों में धूल खा रहे प्रोजेक्ट, जिनका सिर्फ शिलान्यास होता था उद्घाटन नहीं, उन्हें सुक्खू सरकार ने टारगेट पर लिया और बड़सर को एक साथ 3 बड़ी सौगातें दे दीं।
*’1. मिनी सचिवालय: 15 साल बाद पूरा होगा सपना’*
बड़सर का मिनी सचिवालय पिछले 15 साल से अधर में लटका था। फाइलें आगे-पीछे होती रहीं, बजट आता-जाता रहा। मुख्यमंत्री सुक्खू ने इसे प्राथमिकता पर लिया और करोड़ों की लागत से इसे पूरा करवाने का बीड़ा उठाया। अब बड़सर की जनता को छोटे-छोटे कामों के लिए हमीरपुर-ऊना के चक्कर नहीं काटने पड़ेंगे।
*’2. बस अड्डा: धूमल ने किया शिलान्यास, सुक्खू देंगे हकीकत’*
बस अड्डे का शिलान्यास पूर्व सीएम *’प्रेम कुमार धूमल’* के समय हुआ था। उसके बाद 15 साल तक ईंट तक नहीं लगी। सुक्खू सरकार ने 2 करोड़ का बजट देकर इस प्रोजेक्ट को पटरी पर ला दिया। अब बड़सर को आधुनिक बस अड्डा मिलेगा।
*’3. 15 अगस्त: राज्यस्तरीय समारोह बड़सर में’*
आजादी के जश्न की सबसे बड़ी पहचान राज्यस्तरीय समारोह है। इस बार ये सम्मान बड़सर को मिला है। इससे पूरे क्षेत्र का विकास होगा, पहचान बढ़ेगी और हजारों लोगों को रोजगार के मौके मिलेंगे।
*’भाजपा के लिए सबक’*
15 साल भाजपा सत्ता में रही। बड़सर को शिलान्यास तो बहुत मिले, पर पूरे प्रोजेक्ट कितने हुए? सुक्खू सरकार ने 1 साल में वो कर दिखाया जो पिछली सरकारें 15 साल में नहीं कर पाईं।
*’सुक्खू मॉडल’* साफ है – घोषणा नहीं, क्रियान्वयन। राजनीति से ऊपर उठकर विकास।
बड़सर की जनता अब खुद तय करेगी कि विकास किसके राज में हुआ। शिलान्यास की राजनीति से या काम की राजनीति से।
*’निष्कर्ष:’* मिनी सचिवालय, बस अड्डा और राज्यस्तरीय 15 अगस्त। ये तीनों सौगातें बता रही हैं कि बड़सर अब हिमाचल के विकास मानचित्र पर सेंटर स्टेज में है।
*’15 साल का इंतजार खत्म। अब बड़सर बदलेगा।’*
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