बाबा बालक नाथ महंत परंपरा तथा महंत गददी परंपरा का महत्व
अधूरी मानी जाती है महंत की गाददी पर दर्शन के बिना बाबा बालक नाथ की यात्रा
दियोटसिद्ध। सतीश शर्मा विट्टू। उत्तरी भारत का प्रमुख सिद्ध पीठ बाबा बालक नाथ डेरा महंत श्री श्री 1008 राजेंद्र गिरी वर्तमान में महंत परंपरा का निर्माण कर रहे हैं बाबा बालक नाथ मंदिर से जुड़ी परंपराओं के अनुसार बाबा बालक नाथ मंदिर में महंत संचालन करने में महत्वपूर्ण भूमिका अदा करते रहे हैं। उनके गुरु शिव गिरी महाराज का बरसी मेला 19 फरवरी को धूमधाम से मनाया जा रहा है। परंपरा के अनुसार महंत परंपरा गुरुओं से जुड़ी रही है उनकी समाधिया इसका साक्षात उदाहरण है पहले मठ समाधिया स्थान पर असंख्या समाधियां बनी है। माना जाता है कि महंत बाबा बालक नाथ की ट्रस्ट व्यवस्था से पहले लंगर व्यवस्था पानी की व्यवस्था रहने की व्यवस्था खाने पीने की व्यवस्था तथा श्रद्धालुओं की सुविधाओं का ध्यान रखते थे। महंत शिव गिरी महाराज ने लंगर व्यवस्था शिक्षा के लिए डिग्री कॉलेज श्रद्धालुओं के लिए रहने की व्यवस्था बच्चों की पढ़ाई के लिए डिग्री कॉलेज संस्कृत कॉलेज तथा हाई स्कूल की पढ़ाई शुरू करवाई थी। परंपरा रही है कि जो श्रद्धालु बाबा बालक नाथ के दर्शन के लिए आते हैं वह महंत की गद्दी पर भी जाकर दर्शन करते हैं आज भी मान्यता है कि बाबा बालक नाथ के दर्शनों का लाभ लेने के साथ ही महंत की गददी पर जाकर भी श्रद्धालु अपनी यात्रा को पूरा करते हैं श्रद्धालुओं का मानना है कि महंत तथा बाबा बालक नाथ के दर्शन का संयोग जिस व्यक्ति के जीवन में मिलता है उन्हें यात्रा पूर्ण करने का लाभ माना जाता है। और असंख्या श्रद्धालु बाबा बालक नाथ के दर्शन के लिए आते हैं तो महंत की गददी पर जाकर भी आशीर्वाद प्राप्त करते हैं। महंत राजेंद्र गिरी श्रद्धालुओं की सुविधा के लिए विभिन्न सामाजिक आयोजनों में भाग लेते हैं तथा विदेश में जाकर भी बाबा के मंदिरों में बाबा का प्रचार प्रसार करते हैं।
19 फरवरी को बरसी मेला आयोजित किया जा रहा है जिसमें देश-विदेश से हजारों की संख्या में श्रद्धालु दर्शनों के लिए पहुंचेंगे आप सब सादर आमंत्रित हैं।
